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Kaal Sarp Dosha

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Kaal Sarp Dosha
कालसर्प दोस एक ऐसा दोस है जिसके बारे में ना ही बताने वाले को पूर्ण ज्ञान है और जातक तो जान ही कैसे सकता है l यदि विचार किया जावे तो कालसर्प दोस आपके अशुभ कर्म व अशुभ चिंतन का ही परिणाम है l क्या आप जानते हैं एक बार चक्रवर्ती सम्राट परीक्षित ने समीक ऋषि के गले में मृत सर्प डाल दिआ तो सृंगी ऋषि नेअभिशाप दिआ की आज से सातवें दिन तक्षक नाग के काटने से महाराज की मृत्यु हो जावेगी l परीक्षित को तक्षक नाम का कालसर्प दोस लग गया और पूज्य गुरदेव श्री शुकदेव बाबा से श्री मद भागवत कथा का रसपान कर जीवन मुक्त हो गए परन्तु आप जीवन मुक्त नहीं हो सकते कुछ समय के लिए शांति अवस्य मिलती है पूजा पाठ करने व कराने से ,फिर आपके जीवन में वही अंधकार व्याप्त हो जाता है क्योंकि आप का कर्म व चिंतन अशुभ ही रहता है और दूसरी बात बाबा भोले नाथ आपने तप किया आपको वरदान दे दिआ दूसरे ने किया आपके अशुभ चिंतन व अशुभ कर्म के कारण आपके ऊपर दूसरे का वरदान हावी हो गया जैसे रावण के अशुभ कर्म के ऊपर भगवन श्री राम का वरदान हावी हो गया और शिव के कृपा प्रसाद से राम की जय जय कार हो गयी रावण परास्त हो गया तो याद रखो अशुभ चिंतन व अशुभ कर्म का नाम ही काल सर्प दोष है l ना ही अशुभः करोगे ना ही भय होगा ना काल सर्प दोस लगेगा ,संसार का इस कराल कलिकाल में कोई भी मानव काल सर्प दोस से बचा नहीं है इसलिए पूजा पाठ अनवरत कराते रहा करो राहु केतु के मध्य सभी गृह होते हैं तभी ही नहीं होता यह तो हर पल आपसे जुड़ा है ,जीवन का कल्याण इसी बात में है आप स्वयं भी पूजा करें और विद्वान गुनी मंत्र ज्ञाता ब्राह्मण से भी बार बार पूजा कराते रहो यह काल सर्प तो जिसने धरा पर जनम ले लिए उसी के जीवन में लग जाता है क्योंकि आप घर परिवार दूकान व्यापार यात्रा अंदर बाहर सभी जगह तो अशुभ कर्म व अशुभ चिंतन में मस्त रहते ही हैं कलियुग का प्रभाव ही ऐसा है तो मेरे प्रियजनों अशुभः कर्म चिंतन का त्याग करो प्रभु के चरणों में ध्यान करो नाम मंत्र का श्रद्धा से जाप करो चतु श्लोकी भागवत का पाठ करो , जीवन आलोकित हो जावेगा।
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